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Chabahar Port Agreement In Hindi: अरागची ने चाबहार को कहा सुनहरा दरवाजा, भारत से खास उम्मीद!

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 Chabahar Port Agreement In Hindi: अरागची ने चाबहार को कहा सुनहरा दरवाजा, भारत से खास उम्मीद!

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने चाबहार बंदरागह (Chabahar Port Agreement in hindi) को दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा प्रतीक कहा है। उन्होंने नई दिल्ली के अपने दौरे पर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का एक सुनहरा दरवाजा बताया है। ईरान मंत्री ने यह उम्मीद जताई है कि कई सारी वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारत इस प्रोजेक्ट (chabahar port latest update in hindi) को विकसित करना जारी रखेगा। ब्रिक्श देशों की बैठक के बाद आयोजित हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने साफ किया कि यह समुद्री हब दोनों देशों के लिए काफी अहम है।

रणनीतिक रूप से काफी अहम है चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port Agreement in hindi)

बता दें कि अरागची विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक (Chabahar Port lates news in hindi) की। ईरान विदेश मंत्री ने बैठक में कहा कि यह समुद्री व्यापारिक केंद्र भारत के लिए व्यापार को बढ़ाने का एक बड़ा साधन बन सकता है। इसके जरिए भारतीय सामान बहुत आसानी से और कम समय में मध्य एशिया के देशों तक पहुंचाया जा सकता है। दूसरी तरफ, यह बंदरगाह यूरोप की मंडियों तक अपनी पैठ मजबूत करने के लिए भी ट्रांजिट रूट का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो सकता है।

उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि दोनों देशों के पुराने संबंध इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने में मदद करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह विशेष प्रोजेक्ट केवल दो देशों के लिए ही नहीं है, बल्कि इसका लाभ ग्लोबल लेवल पर भी देखने को मिल सकता है। इसके माध्यम से यूरोप और मध्य एशिया के देशों को सीधे हिंदमहासागर तक पहुंच मिलेगी।

ईरान मंत्री ने कहा कि सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर यह एक मजबूत कड़ी है। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत और ईरान मिलकर इस काम को गति दे, ताकि इसके रणनीतिक हिस्सों को आसानी से प्राप्त किया जा सके और दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ हो सके।

बंदरगाह के विकास में आईं रुकावटें (India’s chabahar port in hindi)

अब्बास अरागची का ऐसा मानना है कि इस बड़े प्रोजेक्ट की रफ्तार में कुछ रुकावटें जरूर आईं है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से निवेश और निर्माण कार्यों की गति पर प्रभाव पड़ा है। यही कारण हैं कि पिछले कुछ समय से इस प्रोजेक्ट के काम की गति धीमी हुई है। इसके बाद भी ईरान को उम्मीद है कि भारत की लीडरशिप में यह काम जल्दी से खत्म होगा और दोनों पक्ष मिलकर इन बाहरी बाधाओं का रास्ता निकाल सकते हैं।

द्विपक्षीय बातचीत से बढ़ेगा सहयोग का दायरा (India’s chabahar port in hindi)

ईरान के मंत्री की भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में भी इस विषय पर गहराई से चर्चा की गई है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार शेयर किए हैं। ईरान का मानना है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत अच्छी साख है। ऐसे में भारत इस क्षेत्र में शांति और कूटनीति को बढ़ावा देने में एक सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए है बेहतर विकल्प

इस बंदरगाह की मदद से पाकिस्तान के समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम होगी और कनेक्टविटी के सीधे रास्ते खुल जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और ईरान के बीच इस योजना को लेकर एक लंबे समय का समझौता (Chabahar Port Agreement in hindi) भी हो चुका है, जो कि भारतीय जहाजों को सुरक्षा और आसानी से व्यापार करने का मौका देगा। इस कॉरिडोर के माध्यम से क्षेत्र के सभी देशों के व्यापारिक हित आपस में जुड़े हुए हैं, जो आने वाले समय में एक बड़े विकास का कारण बन सकते हैं।

ईरान ने दिलाया भारत को भरोसा

ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति के लिए हमेशा तैयार है। पुराने समय में भारत ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीददार रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से रोकना पड़ा था। खबरें है कि तेहरान एक बार फिर कच्चे तेल का व्यापार शुरू करने के लिए (Chabahar Port lates news in hindi) तैयार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसी संवेदनशील जलसीमा में जहाजों की सुरक्षा के लिए दोनों देश लगातार आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं, जो समुद्री व्यापार के लिए एक जीवन रेखा है।

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