Khajuraho Mandir: किसने और क्यों बनाए ये अद्भुत मंदिर? जानें पूरी कहानी
भारत के हृदय प्रदेश (मध्य प्रदेश) में बसा ‘khajuraho Mandir’ अपनी कामुक मूर्तिकला और अद्भुत वास्तुकला के लिए पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर समूह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का एक ऐसा अनमोल खजाना है, जो कि प्राचीन काल का कलात्मक कौशल और उन्नत सोच का प्रदर्शन करता है।
यह स्थल न केवल धार्मिक महत्व को दर्शाता है, बल्कि मध्यकालीन भारतीय इतिहास की सबसे बेहतरीन स्थापत्य कला का जीता-जागता उदाहरण है। यहां की दीवारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी इस मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती है।
इसकी नक्काशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बिंदू मानी जाती है। आज के इस लेख में हम khajuraho mandir history in hindi के बारे में विस्तार से वर्णन करेंगे। साथ ही यह कहां स्थित है और इसमें कौन-कौन से मंदिर हैं और उनकी क्या कहानी है? यह भी जानेंगे।
खजुराहो मंदिर कहां स्थित है? (Khajuraho Mandir Kahan Hai)
आपको बता दें कि यह प्रसिद्ध मंदिर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित है। खजुराहो एक छोटा सा शहर है, जो कि पूरी तरह से एतिहासिक इमारतो के आस-पास बना हुआ है। मध्य प्रदेश का यह लोकप्रिय मंदिर झांसी से लगभग 175 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।
अपनी भौगोलिक स्थिति और एतिहासिक महत्व की वजह से इस जगह पर पूरे साल भर तक पूरी दुनिया से लोग घूमने आते हैं। वहीं, इसे घूमने आने वालों के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़े सभी साधन आसानी से मिल जाते हैं। यूनेस्को ने इसकी अद्भुत शिल्पकारी और एतिहासिक महत्वपूर्णता को देखते हुए इसे ‘विश्व धरोहर’ की सूची में शामिल किया है।
खजुराहो मंदिर की इस कलाकारी को (khajuraho temple art in hindi) देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। इसकी प्रसिद्धि का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि यहां की मूर्तियां और मंदिर निर्माण की ‘नागर शैली’ दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलती है।
खुजराहो मंदिर का इतिहास और महत्व (khajuraho mandir history in hindi)
इसके इतिहास को समझने के लिए हमें चंदेल वंश के गौरवशाली काल की तरफ मुड़कर देखना पड़ेगा। इन मंदिरों का निर्माण 950 ईस्वी से 1050 ईस्वी के बीच चंदेल राजाओ ने करवाया था। इतिहास के जानकारों के मुताबिक, उस समय खजुराहो चंदेल साम्राज्य की सांस्कृतिक राजधानी हुआ करती थी।
उस युग में यहां कुल 85 मंदिर थे, जो कि लगभर 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र तक फैले हुए थे। लेकिन विदेशी आक्रमणों की वजह से वर्तमान में यहां केवल अब 20-25 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं। चंदेल राजाओं ने इन मंदिरों का निर्माण पूजा-पाठ करने के साथ ही कला के प्रदर्शन के लिए भी करवाया था।
लेकिन मुस्लिम शासकों के प्रवेश से ही ये मंदिर धीरे-धीरे जंगलों में छिप गए और बाद में भुला दिए गए। 19वीं शताब्दी में एक ब्रिटिश अधिकारी टी.एस बर्ट ने इन्हें फिर से ढूंढ निकाला। आज के समय में ये सुंदर मंदिर ना केवल मध्यकालीन भारतीय इतिहास की वीरता को दर्शाता है, बल्कि कला और आध्यात्मिका का अनूठा संगम भी माना जाता है। यहां के हर एक पत्थर पर उस दौर की एक कहानी नजर आती है।
खजुराहो मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे में जानें
- खजुराहो के मंदिरों में केवल 10 प्रतिशत मूर्तियां ही कामुक श्रेणी की हैं, बाकी 90 प्रतिशत मूर्तियां सामान्य जनजीवन और देवताओं की हैं।
- इन मंदिरों को बिना किसी सीमेंट या गारे के इस्तेमाल किए 'इंटरलॉकिंग' तकनीक से डिजाइन किया गया है।
- 1986 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था।
- स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, खजुराहो को इस नाम की विरासत 'खजूर' के पेड़ों की वजह से मिली है। एक समय में यहां खजूर बहुत मात्रा में थे।
खजुराहो मंदिर की वास्तुकला (khajuraho temple art in hindi)
यहां की वास्तुकला ‘नागर शैली’ का सबसे सुंदर रूप मानी जाती है। इन मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता इनके ऊंचे शिखर और पत्थर पर उकेरी गई शानदार नक्काशी है। यहा पर उपस्थित हर एक मंदिर ऊंचे चबूतरे पर बना है और इनमें प्रवेश द्वार, मंडप और गर्भगृह जैसी संरचनाएं (डिजाइन) बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बनाई गई हैं। दीवारो पर की गई नक्काशी इतनी बारीक है कि यहां का हर पत्थर जीवित नजर आता है।
यहां की मूर्तियों में न केवल कामुकता दिखती है, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियां जैसे- संगीत, नृत्य, श्रंगार, युद्ध और खेती का भी सुंदर नजारा देखने को मिलता है। खजुराहो की कला हमें संदेश देती है कि काम और भौतिक सुख भी मोक्ष के मार्ग का हिस्सा हो सकते हैं। सांसरिक जीवन और आध्यात्मिकता का ये अनोखा संगम हमें दुनिया के किसी भी स्थान पर मिलना मुश्किल है।
जानें खजुराहो में कौन-कौन से मंदिर हैं?
खजुरहो के प्रमुख मंदिरों की सूची और उनके महत्व को समझें।
कंदरिया महादेव मंदिर: यह khajuraho shiv mandir का सबसे बड़ा और भव्य मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपने विशाल शिखर के लिए जाना जाता है।
लक्ष्मण मंदिर: यह मंदिर अपनी बेहतरीन नक्काशी और सुसज्जित दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। इसे भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है।
पार्श्वनाथ मंदिर: यह एक प्रसिद्ध khajuraho jain mandir है, जो जैन धर्म की परंपराओं और वास्तुकला को दर्शाता है।
चौसठ योगिनी मंदिर: यह खजुराहो का सबसे पुराना मंदिर है, जो ग्रेनाइट पत्थर से बना है।
चित्रगुप्त मंदिर: सूर्य देव को समर्पित यह मंदिर खजुराहो का एक मात्र सूर्य मंदिर है।
वराह मंदिर: यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।
खजुराहो मंदिर समूह का विभाजन
| समूह का नाम | प्रमुख मंदिर | विशेषता |
| पश्चिमी समूह | कंदरिया महादेव, लक्ष्मण मंदिर | अधिक लोकप्रिय और अच्छी स्थिति में |
| पूर्वी समूह | पार्श्वनाथ, आदिनाथ मंदिर | मुख्य रूप से जैन मंदिरो का समूह |
| दक्षिणी समूह | दूल्हादेव, चतुर्भुज मंदिर | बेहतरीन नक्काशी और शांत वातावरण |
खजुराहो मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
खजुराहो केवल अपनी मूर्तिकला के लिए ही नहीं जाना जाता है, बल्कि इसमें कई सारे धार्मिक और सांस्कृति महत्व भी छिपे हुए हैं। यह स्थल भारतीय दर्शन के उस उदार दृष्टिकोण का वर्णन करता है, जहां हिंदू और जैन धर्म का संगम एक साथ देखने को मिलेगा। यहां एक ही जगह पर भगवान विष्णु, भगवान शिव, सूर्य देव के मंदिरों के साथ जैन तीर्थस्थल भी देखने को मिल जाएंगे।
इससे यह पता चलता है कि चंदेल शासन काल में भी समाज विभिन्न धर्मों का सम्मान करना जानता था। पर्यटन और शिक्षा का महत्व बढ़ने के बाद यह स्थान इतिहासकारों और छात्रों के लिए प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग और सामाजिक व्यवस्था को समझने की एक खुली किताब है।
खजुराहो मंदिर तक कैसे पहुंचे?
अगर आप खजुराहो घूमने की योजना बना रहे हैं तो, यहां तक पहुंचना बहुत आसान है। बता दें कि खजुराहो का अपना रेलवे स्टेशन है और यहां एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है। अगर आप सड़क के रास्ते से जाना चाहते हैं, तो आपको मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से बसें भी मिल जाएंगी। इसे घूमने का सबसे अच्छा समय ‘अक्टूबर से मार्च’ के बीच होता है, क्योंकि इस समय मौसम सुहावना होता और गर्मी भी कम लगती है। फरवरी के महीने में यहां 'खजुराहो नृत्य महोत्सव' का आयोजन किया जाता है, जो कला प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन जाता है।
निष्कर्ष
khajuraho Mandir भारतीय सभ्यता का दर्पण माना जाता है, जो कि सदियों पुरानी हमारी सांस्कृतिक धरोहर को अपने में समेटे हुए है। साथ ही यह कलात्मक श्रेष्ठता का वर्णन भी करता है। इसके इतिहास को देखकर पता चलता है कि हमारे पूर्वज कला और विज्ञान में पारंगत थे। इस स्थान की कलाकारी को देखकर आंखों को सुकुन की अनुभूति प्राप्त होती है।
इसके साथ ही यह स्थल लोगों को मानव जीवन के विभिन्न आयामों को गहराई से सोचने के लिए मजबूर करता है। बात करें इसके मंदिरों की तो कंदरिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर अपनी अलग-अलग ऊर्जा के लिए जाने जाते हैं। और सबका अलग-अलग महत्व है।
अगर आप भी कला प्रेमी है और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो एक बार आपको इस अद्भुत खजुराहों मंदिर की सैर अवश्य करनी चाहिए। वहीं, यह भारत की एक ऐसी एतिहासिक विरासत है, जिसे हर भारतीय को देखना चाहिए और इससे जुड़ी सभ्यता को भी समझना चाहिए।
Reference Link
- https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8B_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B9
- https://whc.unesco.org/en/list/240/
- https://www.incredibleindia.gov.in/en/madhya-pradesh/khajuraho/khajuraho-temple-all-you-need
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