Heart Failure Symptoms in Hindi: कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी
आज के समय में बदलते लाइफस्टाइल की वजह से न जाने कितनी बीमारी एक मनुष्य के भीतर पैदा होने लगी है जो कि आगे जाकर एक गंभीर रूप ले लेती है और जिससे जान जाने का जोखिम भी बन जाता है।
उसमें से एक है हार्ट फेलियर जिसके बारे में हम आज से ब्लॉग के ज़रिए समझेंगे। यह एक गंभीर और संभावित रूप से व्यक्ति के लिए जानलेवा स्थिति होती है, जो कि आज के समय में दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती जा रही है।
हार्ट फेलियर गंभीर इसलिए है क्योंकि दिल शरीर की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून पंप करने में असमर्थ हो जाता है, और जिस वजह से फेफड़ों, अंगों और ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने लग जाता है साथ ही इससे व्यक्ति की जीवनशैली पर भी बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। यह पुरानी यानी क्रोनिक स्थिति भी हो सकती है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है और अगर समय से इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
सरल भाषा में कहे तो यह समस्या तब होती है जब व्यक्ति का दिल किसी वजह से कमज़ोर या क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे पूरे शरीर में खून को कुशलतापूर्वक पंप करने में असमर्थता होने लग जाती है।
Heart Failure Meaning in Hindi (हार्ट फेलियर का अर्थ)
हार्ट फेलियर को कई लोग कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के नाम से भी जानते होंगे। हार्ट फेलियर ऐसी एक गंभीर स्थिति है जिसमें दिल शरीर की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि दिल का धड़कना तुरंत बंद हो जाता है, बल्कि दिल की पंपिंग शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसके मुख्य लक्षणों की बात करें तो व्यक्ति की सांस फूलना, बहुत थकान, पैरों/पेट में सूजन और लगातार खांसी हो सकती हैं।
Heart Failure क्या होता है? (What is Heart Failure in Hindi)
हमारे शरीर में दिल का काम एक पंप की तरह होता है जो की शरीर के चार कक्षों यानी चैम्बर्स के माध्यम से ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन-रहित खून को लगातार प्रवाहित करता है।
हमारा दिल शरीर का सबसे मेहनती अंग माना जाता है। दिल बिना रुके दिन-रात हमारे शरीर के लिए काम करता है। इंसान चाहे सो रहा हो, काम कर रहा हो या फिर दौड़ रहा हो, दिल लगातार खून पंप करता रहता है।
अगर हमारा दिल कुछ मिनटों के लिए भी काम करना बंद कर दे, तो शरीर के बाकी अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं। इसलिए दिल को शरीर की “मशीन” या “पंप” कहते हैं।
दिल के कितने भाग होते हैं?
हमारे दिल के अंदर 4 कमरे होते हैं, जिन्हें “चैंबर” कहते हैं।
1. दायाँ आलिंद (Right Atrium)
यह हमारे शरीर से आने वाला गंदा खून लेता है।
2. दायाँ निलय (Right Ventricle)
यह हमारे गंदे खून को फेफड़ों तक भेजता है।
3. बायाँ आलिंद (Left Atrium)
यह हमारे फेफड़ों से साफ और ऑक्सीजन वाला खून प्राप्त करता है।
4. बायाँ निलय (Left Ventricle)
यह हमारे पूरे शरीर में साफ खून भेजता है।
दिल की कार्यप्रणाली (How heart works)
पहला स्टेप: शरीर से गंदा खून दिल तक आता है
जब शरीर ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर लेता है, तो खून में गंदगी और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है यह गंदा खून नसों के जरिए दिल के दाएँ हिस्से में पहुँचता है।
दूसरा स्टेप: दिल खून को फेफड़ों तक भेजता है
दिल का दायाँ हिस्सा इस खून को फेफड़ों तक भेजता है। फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है और नई ऑक्सीजन खून में मिलती है यानी खून साफ हो जाता है।
तीसरा चरण: साफ खून वापस दिल में आता है
फेफड़ों से ऑक्सीजन वाला साफ खून दिल के बाएँ हिस्से में आता है।
चौथा चरण: दिल पूरे शरीर में खून भेजता है
अब दिल का सबसे ताकतवर हिस्सा यानी बायाँ निलय इस साफ खून को हमारे पूरे शरीर में भेज देता है।
● इस खून के जरिए हमारे शरीर को ऑक्सीजन मिलती है साथ ही पोषण और अंग सही तरीके से काम करते हैं।
हार्ट फेलियर कैसे होता है? (Heart Failure Kaise Hota Hai)
हार्ट फेलियर नाम सुनते ही कई लोग सोचते हैं कि दिल अचानक से काम करना बंद कर देता है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। हार्ट फेलियर का सरल अर्थ है कि दिल अपने शरीर की जरूरत के अनुसार सही तरीके से खून पंप नहीं कर पा रहा है। जिससे दिल कमजोर हो जाता है और शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुँचा पाता है।
यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन सही समय पर इलाज और जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
हार्ट फेलियर के कारण (Reason of Heart Failure in Hindi)
व्यक्ति के शरीर में हार्ट फेलियर अचानक से नहीं बल्कि धीरे-धीरे विकसित होता है। कई बीमारियाँ और खराब आदतें व्यक्ति के दिल को कमजोर बना देती हैं।
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप)
जब व्यक्ति के शरीर में ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अधिक रहने लगता है, तो दिल को खून पंप करने के लिए भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। धीरे-धीरे दिल की मांसपेशियाँ मोटी हो जाती हैं फिर कमजोर पड़ने लगती हैं और इससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक के कारण
हार्ट अटैक में दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुँचता है। अगर नुकसान ज्यादा हो तो दिल कमजोर होने लग जाता है और सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता है। यही समस्या आगे चलकर हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है।
धमनियों में ब्लॉकेज
जब दिल तक खून पहुँचाने वाली धमनियों में चर्बी जमा होने लग जाती है, तो खून का प्रवाह समय के साथ कम हो जाता है। इससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और दिल कमजोर होने लगता है जो कि हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ देता है।
डायबिटीज और मोटापा
डायबिटीज और ज्यादा वजन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके कारण ब्लड वेसल्स खराब हो सकती हैं या ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जो कि दिल को कमजोर कर देता है।
धूम्रपान और शराब
सिगरेट और शराब का सेवन दिल और रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुँचाते हैं। इनसे व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है। ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
दिल की मांसपेशियों की बीमारी
कुछ लोगों के मामले में दिल की मांसपेशियाँ जन्म से कमजोर होती हैं या किसी संक्रमण के कारण खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में दिल धीरे-धीरे कमजोर होकर हार्ट फेलियर की ओर बढ़ सकता है।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD)
यह दिल की एक गंभीर बीमारी है। जब दिल तक खून पहुँचाने वाली नसों में चर्बी और कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है, तो नसें पतली या बंद होने लग जाती हैं। जिस वजह से दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। फिर व्यक्ति को सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और जल्दी थकान आदि जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। अगर रुकावट ज्यादा बढ़ जाए, तो यह हार्ट अटैक का भी रूप ले सकती है।
हार्ट वाल्व की समस्या
दिल के अंदर छोटे-छोटे “वाल्व” होते हैं। इनका काम खून को सही दिशा में बहने देने का होता है। ये व्यक्ति के शरीर में वाल्व दरवाज़े की तरह काम करते हैं, ताकि खून पीछे की तरफ वापस न जाए। जब ये वाल्व सही तरीके से काम नहीं करते, तो उसे “हार्ट वाल्व की समस्या” कहते हैं। जैसे वाल्व ठीक से खुल नहीं पाए या पूरी तरह बंद न हों, तो खून का प्रवाह प्रभावित होने लग जाता है। इससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और धीरे-धीरे दिल कमजोर हो सकता है।
हार्ट फेलियर के मुख्य लक्षण (Heart Failure Symptoms in Hindi )
हार्ट फेलियर के सामान्य लक्षण में शामिल हैं:
- सांस फूलना
- जल्दी थक जाना
- पैरों और टखनों में सूजन
- सीने में भारीपन महसूस होना
- तेज या अनियमित धड़कन होना
- रात में बार-बार सांस फूल जाना
- लगातार कमजोरी महसूस होना
दिल का दौरा और दिल का विफल होने के बीच अंतर (Difference Between Heart Attack and Heart Failure in hindi)
बहुत लोग हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर को एक ही बीमारी समझते हैं, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें यह दोनों अलग-अलग समस्याएँ हैं। आइए आसान भाषा में इनके बीच का अंतर समझते हैं।
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुँचाने वाली नस अचानक से ब्लॉक हो जाती है। इस वजह से दिल के किसी हिस्से तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाता है और उस हिस्से को नुकसान होने लगता है। लेकिन हार्ट फेलियर की स्थिति में दिल अपनी पूरी ताकत से खून पंप नहीं कर पाता है। इस वजह से दिल कमजोर हो जाता है और शरीर को पर्याप्त खून नहीं मिल पाता है। यह समस्या व्यक्ति के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती है
| हार्ट अटैक | हार्ट फेलियर |
| अचानक होता है | धीरे-धीरे विकसित होता है |
| नस ब्लॉक होने से होता है | दिल कमजोर होने से होता है |
| दिल के हिस्से को नुकसान पहुँचता है | दिल सही से पंप नहीं कर पाता |
| इमरजेंसी स्थिति होती है | लंबे समय तक चलने वाली बीमारी हो सकती है |
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर दोनों ही दिल की गंभीर समस्याएँ होती हैं और दोनों ही अलग स्थितियाँ हैं। हार्ट अटैक अचानक से होता है और वही हार्ट फेलियर धीरे-धीरे विकसित होता है। समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली से व्यक्ति इन बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है।
हार्ट फेलियर की जांच कैसे की जाती है? (Heart Failure Diagnosis)
जब दिल सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता है, तो डॉक्टर यह पता लगाने के लिए कई जांच करते हैं कि दिल कितना कमजोर हुआ है और समस्या कितनी गंभीर है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि हार्ट फेलियर की जांच कैसे होती है:-
ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन जांच
डॉक्टर ब्लड प्रेशर (heart failure symptoms in hindi) चेक करते हैं और ऑक्सीजन लेवल देखते हैं साथ ही दिल की धड़कन जांचते हैं, इससे दिल की स्थिति का शुरुआती अंदाजा मिल जाता है।
ईसीजी (ECG)
ECG एक सामान्य टेस्ट होता है जो दिल की धड़कन और इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करने में मददगार रहता करता है। इससे पता चलता है दिल की धड़कन सामान्य चल रही है या नहीं। अगर व्यक्ति को कभी पहले हार्ट अटैक हुआ हो, दिल पर दबाव है या नहीं, इसकी जाँच भी हो जाती है।
इकोकार्डियोग्राफी (Echo Test)
यह हार्ट फेलियर की सबसे महत्वपूर्ण जांच के रूप में मानी जाती है। इस टेस्ट में अल्ट्रासाउंड की मदद से दिल की तस्वीर देखी जाती है। इससे पता चलता है कि दिल कितना सही पंप कर रहा है। वाल्व सही काम कर रहे हैं या नहीं और दिल कमजोर है या नहीं।
ईएफ (Ejection Fraction) जांच
कुछ मामलों में इको टेस्ट के दौरान डॉक्टर “इजेक्शन फ्रैक्शन (EF)” भी देखते हैं। यह बताता है कि मरीज का दिल हर धड़कन में कितना खून बाहर भेज रहा है। सामान्य EF में लगभग 50% से 70% होता है और वही कम EF दिल की पंपिंग कमजोर होने का संकेत देता है।
स्ट्रेस टेस्ट या एंजियोग्राफी
अगर डॉक्टर को नसों में ब्लॉकेज का शक होता है तब वह ट्रेडमिल टेस्ट, स्ट्रेस टेस्ट या फिर एंजियोग्राफी की सलाह देते हैं।
हार्ट फेलियर का इलाज (Heart Failure Treatment in Hindi)
हार्ट फेलियर व्यक्ति के लिए एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल शरीर की जरूरत के अनुसार सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता है और यह बीमारी गंभीर हो सकती है। लेकिन समय पर इलाज, सही इलाज के साथ-साथ अच्छी जीवनशैली से इस समस्या को काफी हद तक कण्ट्रोल कर सकते हैं।
दवाइयों से इलाज
हार्ट फेलियर के मरीजों को डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से कई तरह की दवाइयाँ देते हैं। इन दवाइयों का काम होता है कि मरीज के दिल पर दबाव कम करना। मरीज के ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल में रखना और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी कम करना, साथ ही दिल की पंपिंग बेहतर करने में मदद करना।
जीवनशैली में बदलाव
अगर व्यक्ति हार्ट फेलियर की स्थिति में अच्छी जीवनशैली अपनाए तो सुधार हो सकता है, उसके लिए ज़रूरी बदलाव करने होंगे जैसे कि -
- कम नमक वाला भोजन का सेवन शुरू कर दें
- तला-भुना कम खाएं
- रोज़ हल्का व्यायाम शुरू करें
- वजन को नियंत्रित करें
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए
- पर्याप्त नींद ज़रूर लें
- तनाव कम करने के लिए योग करें
पेसमेकर या डिवाइस
कुछ मरीजों में दिल की धड़कन बहुत ही कमजोर या अनियमित हो जाती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज को पेसमेकर या ICD डिवाइस लगाने की सलाह दे सकते हैं। ये उपकरण दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
स्टेंट या सर्जरी
अगर हार्ट फेलियर का कारण नसों में ब्लॉकेज है, तो डॉक्टर मरीज को स्टेंट डाला जा सकता है यानी बायपास सर्जरी की जा सकती है। कुछ मामलों में वाल्व की सर्जरी भी करनी पड़ जाती है।
हार्ट ट्रांसप्लांट
बहुत ही ज्यादा गंभीर स्थिति में, जब दिल लगभग काम करना बंद कर देता है और बाकी इलाज असर नहीं करते हैं तब डॉक्टर लास्ट में हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं। यह सबसे अंतिम विकल्प माना जाता है।
हार्ट फेलियर से बचाव कैसे करें? (Prevention Tips for heart failure in hindi)
हार्ट फेलियर से बचने के लिए व्यक्ति कुछ बातों का ध्यान रख सकता है और इस गंभीर समस्या से बचाव कर सकता है -
- रोज़ व्यायाम करना शुरू करें
- संतुलित भोजन का सेवन करें
- नमक और तैलीय चीजों का सेवन कम करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें
- धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें
- वजन कण्ट्रोल में रखें
- नियमित हेल्थ चेकअप ज़रूर करवाएँ
हार्ट फेलियर के जोखिम कारक क्या होते हैं? (Risk factors of heart failure in hindi)
जो चीजें हार्ट फेलियर या दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ाती हैं, उन्हें “जोखिम कारक” कहा जाता है।
इन कारणों से दिल धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर
अगर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या लंबे समय से है और ज्यादा रहता है, तो दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल कमजोर हो सकता है।
डायबिटीज
डायबिटीज (heart failure symptoms in hindi) की वजह से शरीर की रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुँचाता है। इससे दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है साथ ही हार्ट फेलियर का जोखिम भी बढ़ जाता है।
मोटापा
मोटापा (heart failure symptoms in hindi) बहुत-सी बीमारियों का कारण बनता है और ज्यादा वजन होने पर दिल को शरीर में खून पहुँचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस वजह से हार्ट फेलियर का ख़तरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान और शराब
सिगरेट और शराब दिल और नसों को नुकसान पहुँचाने का काम करते हैं। इनके सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
खराब खानपान
बहुत ज्यादा तला-भुना, जंक फूड, ज्यादा नमक, ज्यादा तेल और चीनी वाला खाना खाने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
व्यायाम की कमी
शारीरिक गतिविधि कम होने से वजन बढ़ता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है जिस वजह से दिल कमजोर हो सकता है।
तनाव (Stress)
अगर व्यक्ति को लगातार तनाव रहता है तो ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है साथ ही नींद खराब हो सकती है जिसका दिल पर बुरा असर पड़ सकता है।
बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ दिल और रक्त वाहिनियाँ कमजोर होने लग जाती हैं। इसलिए बुजुर्ग लोगों में हार्ट फेलियर का खतरा सबसे अधिक होता है।
परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास
अगर परिवार में पहले किसी को दिल की बीमारी रही हो, तो दूसरे लोगों में भी दिल की समस्या होने का खतरा बढ़ सकता है।
पहले हार्ट अटैक आना
पहले हार्ट अटैक आने से दिल की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे आगे चलकर हार्ट फेलियर होने का ख़तरा बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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