Infertility Meaning in Hindi: इनफर्टिलिटी क्या है? कारण, लक्षण और इलाज
आज के समय में जब हर कपल अपने परिवार को आगे बढ़ाने का सपना देखता है, तो वहीं कुछ लोगों के लिए माता-पिता बनना आसान नहीं रह गया है। लगातार तमाम कोशिशों के बाद भी गर्भाधारण ना होना ना केवल एक शारीरिक समस्या है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गहरा प्रभाव डालती है। इस स्थिति को Infertility (नि:संतानता) कहा जाता है, जो कि आज तेजी सी बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है।
इसके पीछे का मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, गलत खान-पान और बढ़ती उम्र है। इसलिए इस विषय को समझना और समय रहते हुए इसके लिए उचित कदम उठाना बेहद ही आवश्यक है। आइए जानते हैं कि Infertility Meaning In Hindi क्या है? और इसके कारण, लक्षण, बचाव और इलाज क्या है?
नि:संतानता का मतलब (Infertility Meaning in Hindi)
‘Infertility’ का मतलब है कि जब कोई कपल नियमित रूप से बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के संबंध बनाते है, इसके बावजूद 1 साल तक गर्भाधारण नहीं होता है, तो इसे ‘इनफर्टिलिटी’ कहा जाता है। यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक है, तो यह अवधि 6 महीने की मानी जाती है।
इनफर्टिलिटी केवल महिलाओं से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह पुरुषों में भी देखने को मिल सकती है। अधिकांश मामलों में दोनों कपल्स की स्वास्थ्य स्थिति इसका कारण बनती है।
यह समस्या शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस, ओव्यूलेशन में परेशानी, स्पर्म काउंट कम होना, लाइफस्टाइल में परिवर्तन या फिर उम्र बढ़ने के कारण हो सकती है। इसके अलावा, कुछ मामलों में इसका कारण स्पष्ट नहीं होता है, जिसे अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी कहा जाता है।
इनफर्टिलिटी का मतलब यह नहीं कि कभी बच्चा पैदा ना हो। आज के समय में मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की की है कि, सही इलाज, दवाईया IUI और IVF की मदद से इसका इलाज संभंव है। आइए इसके प्रकार, कारण, लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में विस्तार से जान लेतें हैं।
इनफर्टिलिटी के प्रकार (Types of Infertility)
इनफर्टिलिटी की समस्या भी अलग-अलग प्रकार की होती है।
- Primary Infertility: जब कोई महिला कभी भी गर्भधारण नहीं कर पाती है, जबकि वह काफी लंबे समय से कोशिश कर रही हो। यह पहली बार गर्भ ठहरने की समस्या को दर्शाता है।
- Secondary Infertility: जब महिला पहले गर्भधारण कर चुकी हो, लेकिन बाद में दोबारा गर्भ ठहरने में समस्या आ रही हो। यह समस्या अधिकतर बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य और हार्मोन में होने वाले बदलाव के कारण होती है।
- Unexplained Infertility: इसमें सभी मेडिकल टेस्ट सामान्य आते हैं, लेकिन फिर भी गर्भधारण करने में समस्या होती है। कुल मिलाकर इसमें Infertility के सही कारणों का पता नहीं चलता है।
पुरुषों में इनफर्टिलिटी का मतलब (Male Infertility Meaning in Hindi)
पुरुषों में इनफर्टिलिटी के कई कारण हो सकते हैं।
- स्पर्म काउंट कम हो जाना।
- स्पर्म की गुणवत्ता (कमजोर या असामान्य आकार) खराब हो जाना।
- स्पर्म का सही से आगे ना बढ़ पाना।
- हार्मोन्स में परिवर्तन होना।
- STD या अन्य इंफेक्शन से स्पर्म प्रभावित होना।
- अंडकोष की नसों में सूजन आना। इससे खून का प्रवाह प्रभावित होता है और स्पर्म क्वालिटी में खराबी होने की संभावना रहती है।
- जेनेटिक यानी जन्म से जुड़ी बीमारियां होना।
- कुछ दवाइया जैसे- कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या स्टेरॉयड भी स्पर्म क्वालिटी खराब कर सकती हैं।
- लगातार वजन का बढ़ना भी इनफर्टिलिटी का कारण बनता है।
- विटामिन या मिनरल्स से भरपूर आहार ना लेना।
- धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन करना, ड्रग्स लेना, डिप्रेशन आदि भी इसके कारण माने जाते हैं।
- टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ने से भी स्पर्म की गुणवत्ता में कमी आती है, जैसे- टाइट कपड़े पहनना, लैपटॉप को गोद में रखना, ज्यादा गर्मी वाली जगह पर रहना आदि।
महिलाओं में इनफर्टिलिटी का मतलब (Female Infertility Meaning in Hindi)
महिलाओं में इनफर्टिलिटी का मतलब है लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी गर्भाधारण ना होना। इसकी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
- अंडाणु और शुक्राणु का सही समय पर ना बनना या रिलीज ना होना।
- अंडाणु और शुक्राणु का सही से मिलन ना होना।
- हार्मोन का इंबैलेंस होना भी एक कारण हैं।
- कुछ महिलाओं को PCOS/PCOD की समस्या रहती है। यह भी इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण माना जाता है।
- फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना।
- बढ़ती उम्र से भी फर्टिलिटी कम हो जाती है।
- एंडोमेट्रियोसिस या गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं भी इनफर्टिलिटी का कारण बनती हैं।
इनफर्टिलिटी का इलाज (Infertility Treatment in Hindi)
इनफर्टिलिटी का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या का क्या कारण है? इसमें उम्र के साथ-साथ कितने समय से कोशिश की जा रही है और दोनों पाटनर्स की सेहत का भी ध्यान रखा जाता है। कई बार एक ही व्यक्ति का इलाज जरूरी होता है, जबकि कई मामलों में दोनों पाटनर्स को इलाज की जरूरत होती है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि आज के समय में सही इलाज से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है और इसका इलाज (Infertility Treatment In Hindi) भी समय रहते किया जा सकता है।
फर्टिलिटी के लिए सामान्य उपचार (Common Infertility Treatment in Hindi)
कुछ महिलाओं को गर्भधारण करने के लिए ART (Assisted Reproductive Technology) की आवश्यकता होती है। स्पर्म को कंट्रोल करके प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ती है। कई बार ओव्यूलेशन बढ़ाने के लिए दवाइयां भी दी जाती है। यहां ART के मुख्य तरीके दिए गए हैं।
- IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन): इस प्रोसेस में महिला के अंडाशय से अंडे निकल जाते हैं और लैब में उन्हें शुक्राणुओं के साथ मिलाया जाता है। जैसे ही भ्रूण बन जाता है, तो डॉक्टर उसे गर्भाशय में डाल देते हैं।
- ICSI (इंट्रसाइटोप्लाज्मिक) स्पर्म इंजेक्शन: यह IVF का ही पार्ट है। इसमें स्पर्म एक-एक कर सीधे अंडे के अंदर इंजेक्ट किए जाते हैं। ऐसा उस स्थिति में किया जाता है, जब स्पर्म की क्वालिटी कमजोर होती है।
- IUI (इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन): इसमें स्पर्म को सीधे महिला के गर्भाशय में इंजेक्ंट किया जाता है, ताकि स्पर्म सीधे आसानी से अंडे तक पहुंच सके।
- Assisted Hatching: इसमें भ्रूण की बाहरी परत को थोड़ा खोला जाता है, जिससे वह गर्भाशय में आसानी से चिपक सके और प्रेगनेंसी के चांस में बढ़ोत्तरी हो।
- थर्ड पार्टी ART: कुछ मामलों में दाता (Donor) की मदद भी ली जाती है, जिसमें कपल्स डोनर एग, डोनर स्पर्म या डोनर एम्ब्रॉय का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कपल्स को सरोगेट मां या गर्भधारण कराने वाली महिला की आवश्यकता होती है।
पुरुषों में इनफर्टिलिटी का इलाज कैसे होता है?
पुरुषों में इनफर्टिलिटी को दूर करने की एक प्रोसेस है, जिसमें डॉक्टर्स यह समझने की कोशिश करते हैं कि समस्या स्पर्म, हार्मोन या प्रजनन के किस लेवल पर है। इसके लिए सही कारण की जांच करना बेहद जरूरी होता है, ताकि उचित इलाज किया जा सके।
- मेडिकल और सेक्सुअल हिस्ट्री: इसमें डॉक्टर मरीज से पहले हुई बीमारी या सर्जरी, इरेक्शन, स्खलन (यौन से जुड़ी समस्याएं), धूम्रपान, शराब या दवाई का सेवन और परिवार में किसी को जुड़ी प्रजनन समस्या के बारे में पूछते हैं। इसके बाद इलाज करने में आसानी होती है।
- फिजीकल टेस्ट: इसमें डॉक्टर टेस्टिकल्स, लिंग और आसपास के हिस्सों की जांच कर पता लगाते हैं कि अंडकोष का आकार कैसा है, वैरिकोसील की नसो में सूजन तो नहीं है या फिर कोई गांठ, असामान्यता आदि की पहचान। ताकि सही समस्या का पता लगाकर इलाज किया जा सके।
- वीर्य (Semen) विश्लेषण: इसे सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट माना जाता है। इसमें स्पर्म काउंट, स्पर्म की स्पीड, स्पर्म का साइज, सीमन की क्वालिटी और क्वालिटी का परीक्षण किया जाता है।
- हार्मोन टेस्ट: इसमें ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में पर्याप्त मात्रा में हार्मोन बन रहे हैं या नहीं देखा जाता है। इसमें टेस्टोस्टेरोन, FSH (Follicle Stimulating Hormone), LH (Luteinizing Hormone) जैसे टेस्ट शामिल हैं।
- जेनेटिक टेस्टिंग: जेनेटिक टेस्ट से डॉक्टर पता लगाते हैं कि स्पर्म काउंट बहुत कम या शून्य तो नहीं हो गया है। इससे पता चलता है कि कहीं कोई Chromosome से जुड़ी कोई समस्या तो नहीं है।
- अल्ट्रसाउंड: इससे अंडकोष का वैरिकोसील, ब्लॉकेज या अन्य चीजों का पता लगाने में मदद मिलती है।
- टेस्टीकुलर बायोप्सी: कुछ मामलों में अंडकोष से यह पता करने के लिए सैंपल लिए जाते हैं कि स्पर्म बन रहे हैं या नहीं। यह टेस्ट उस स्थिति में किया जाता है, जब वीर्य में स्पर्म नहीं मिलते हैं।
- पोस्ट इजैकुलेशन टेस्ट: यह टेस्ट पता लगाता है कि स्खलन के बाद स्पर्म Urinary Bladder में तो नहीं जा रहे हैं।
- इंफेक्शन टेस्टिंग: कुछ इंफेक्शन स्पर्म की क्वालिटी पर इफेक्ट डालते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि इनकी जांच भी की जाए, ताकि समस्या से छुटकारा पाने में आसानी हो।
- दवाइयां: दवाइयां टेस्टोस्टेरोन या हार्मोन के लेवल को बढ़ा सकती है। वहीं, इरेक्शन बनाए रखने के लिए इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दवाएं भी मौजूद हैं।
- सर्जरी: अगर स्पर्म की नलिकाओं में रुकावट हो या वैरिकोसील जैसी समस्या आती है, तो ऐसे में सर्जरी की जाती है। वैरिकोसेल सर्जरी शुक्राणुओं को हेल्दी बना सकती हैं और गर्भधारण की संभावनाओं को बेहतर बना सकती हैं।
महिलाओं के लिए Infertility का इलाज
- लाइफस्टाइल में बदलाव: वजन सही रखना, धूम्रपान का सेवन न करना, शराब से दूर रहना और अपनी डाइट को हेल्दी रखना प्रेगनेंसी के चांस को बढ़ाता है।
- दवाइयां: कुछ दवाएं अंडाशय को ज्यादा अंडे बनाने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे प्रेगनेंसी के चांस बढ़ते हैं और यह आसान भी हो जाती है।
- सर्जरी: अगर फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हो या गर्भाशय में कोई समस्या हो, तो इसे सर्जरी के द्वारा ठीक किया जाता है।
- ओव्यूलेशन ट्रैक करना: सही समय पर संबंध बनाने के लिए अपने ओव्यूलेशन को ट्रैक करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए आप ओव्यूलेशन किट या फिर ऐप का यूज कर सकते हैं।
निष्कर्ष
'Infertility' एक संवेदनशील विषय है, जो कई कपल्स पर प्रभाव डाल रही है। लेकिन अच्छी बात यह है कि मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी की मदद से सही इलाज संभंव है, जिससे गर्भधारण संभव हो सका है। चाहे पुरुष हो या महिला दोनों में सही समय पर जांच और उचित इलाज से समस्या को ठीक किया जा सकता है।
IVF, IUI और ART जैसी तकनीकें इस समस्या को खत्म करने के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई है। इन सबके अलावा, हेल्दी लाइफस्टाइल, बैलेंस डाइट और डिप्रेशन को भी कम करना उतना ही जरूरी है। सही जानकारी और इलाज से माता-पिता बनने का सपना सच हो सकता है।
Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, इलाज या उपचार का विकल्प ना माने। प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए किसी भी समस्या या लक्षण के लिए योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना ना भूलें।
इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर खुद से इलाज ना करें। यदि आपको प्रजनन या स्वास्थ्य से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर्स की मदद लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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