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ईरान में नया दौर: मोज्तबा खामेनेई ने संभाली कमान

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ईरान में नया दौर: मोज्तबा खामेनेई ने संभाली कमान

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : जैसा कि आपको पता है कि ईरान के इतिहास में एक नए और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में, अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इनकी मौत के बाद, ईरान की राजनीति में एक बहुत बड़ा शून्य पैदा हो गया था।

ईरान में नेतृत्व की कमी को पूरा करने के लिए 8 मार्च 2026 को ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने मोज्तबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है।

Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader

ऐसा कहा जाता है कि ईरान की सत्ता के गलियारों में सालों से मोज्तबा खामेनेई के नाम की चर्चाएँ देखने को मिल रही थी, लेकिन अधिकारिक तौर पर मोज्तबा खामेनेई का नाम अब पूरी दुनिया के सामने आ गया है। 56 वर्ष की आयु में मोज्तबा खामेनेई को ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में चुना गया है।

ख़बरों के अनुसार, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहली बार है जब सत्ता का हस्तांतरण पिता से पुत्र को हुआ है, जिसने ईरान के राजनीतिक ढांचे में एक नई बहस छेड़ दी है।

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ईरान में हुआ सत्ता का ऐतिहासिक हस्तांतरण

यदि आपके मन भी यह सवाल है कि ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन किसके द्वारा किया जाता है, तो बता दें कि ईरान में सर्वोच्च नेता का चयन 'मज्लिस-ए-खबरेगान' द्वारा किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, मोज्तबा खामेनेई का चयन बहुमत को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चयन एक ऐसे समय पर किया गया है, जब ईरान अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। उनके पिता अली खामेनेई ने 36 वर्षों तक देश की कमान संभाली थी, लेकिन उनके जाने के बाद अब मोज्तबा के कंधों पर एक युद्धग्रस्त और प्रतिबंधों से घिरे देश की जिम्मेदारी है।

कौन हैं मोज्तबा खामेनेई?

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। वह अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे पुत्र हैं। उन्होंने अपनी धार्मिक शिक्षा कोम के मदरसों से पूरी की और लंबे समय तक अपने पिता के कार्यालय में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई।

  • सैन्य अनुभव: मोज्तबा खामेनेई ने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था, जिससे उनकी छवि कट्टरपंथियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बीच मजबूत हुई।
  • पर्दे के पीछे की शक्ति: बहुत कम लोग जानते हैं कि मोज्तबा खामेनेई को उनके पिता का गेटकीपर कहा जाता था। इतना ही नहीं, वर्ष 2009 के विवादित चुनावों के दौरान भी उनका नाम सुरक्षा बलों के दमनकारी चक्र को नियंत्रित करने के लिए चर्चा में आया था।

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IRGC का समर्थन और घरेलू चुनौतियां

ईरान की राजनीति के अनुसार, मोज्तबा की नियुक्ति में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ उनके गहरे संबंध ही उन्हें इस पद तक ले आए हैं। हालांकि, उनके लिए राह आसान नहीं है:

  1. वंशवाद का आरोप: ईरान की इस्लामी क्रांति राजशाही और वंशवाद को खत्म करने के आधार पर हुई थी। अब पिता के बाद बेटे का नेता बनना कई धार्मिक और राजनीतिक गुटों को रास नहीं आ रहा है।
  2. क्षेत्रीय युद्ध: इस समय ईरान इजरायल और अमेरिका के साथ सीधे सैन्य संघर्ष की स्थिति में है। मोज्तबा के लिए यह बहुत कड़ी परीक्षा है, क्योंकि उन्हें न केवल अपनी सत्ता बचानी है, बल्कि देश के सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों को भी दिशा देनी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ट्रंप का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर मानने से साफ इनकार कर दिया है। इस बात के संकेत ट्रंप ने पहले ही दिए थे कि वाशिंगटन ऐसे किसी नेता को मान्यता नहीं देगा जो उनकी शर्तों पर खरा न उतरे। इस बयान ने पश्चिम और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

मोज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुने जाने पर कई विश्लेषकों यह कहना है कि मोज्तबा अपने पिता की तुलना में अधिक कट्टर रुख अपना सकते हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि हालिया हमलों में उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों को खोया है।

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निष्कर्ष

क्या आप भी इस बात से सहमत हैं कि मोज्तबा खामेनेई का कार्यकाल ईरान के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा होगा। क्या वह अपने पिता की विरासत को सुरक्षित रख पाएंगे या ईरान एक नए आंतरिक विद्रोह की ओर बढ़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, तेहरान की सड़कों पर उनके समर्थन में रैलियां हो रही हैं, लेकिन आसमान में मंडराते युद्ध के बादल उनके नेतृत्व की पहली अग्निपरीक्षा हैं।