Supercomputer Race in Hindi: चीन बना नंबर 1! जानिए इस रेस में कहां है भारत?
टेक वर्ल्ड में इस समय एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। दरअसल, वैश्विक मंच पर Supercomputer Race in Hindi को लेकर हर तरफ चर्चाएं बेहद तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि चीन ने तकनीकी महाशक्ति अमेरिका को पीछे छोड़कर नंबर 1 का खिताब अपने नाम कर लिया है। करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद चीन ने जिस धमाकेदार अंदाज में इस लिस्ट में वापसी की है, उसने दुनिया भर के टेक एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है।
ऐसे में कई लोगों को यह भी जानने की उत्सुकता होगी कि सुपरकंप्यूटिंग के इस महा-मुकाबले में हमारा भारत कहां खड़ा है और किस नंबर पर विराजमान है। साथ ही लोग यह भी जरूर ही जानना चाहते होंगे कि चीन ने इस उपलब्धि को कैसे हासिल किया और इन सबसे बढ़कर ये 'बाहुबली' सुपरकंप्यूटर आखिर काम कैसे करते हैं।
यदि आपका जवाब हां है, तो इस लेख में आपको आपके सभी सवालों के जवाब तुरंत मिलेंगे। आज के इस डिजिटल और AI युग में सुपरकंप्यूटर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि किसी भी देश की सामरिक, वैज्ञानिक और डिजिटल ताकत का सबसे बड़ा पैमाना बन चुके हैं। आइए, इस हाई-टेक रेस की पूरी इनसाइड स्टोरी को विस्तार से समझते हैं।
Supercomputer Race in Hindi: क्या है सुपरकंप्यूटर और यह कैसे काम करता है?
सरल शब्दों में कहें तो सुपरकंप्यूटर दुनिया का सबसे ताकतवर, सबसे तेज और आकार में बहुत बड़ा कंप्यूटर होता है। यह हमारे घरों या ऑफिसेज में इस्तेमाल होने वाले सामान्य कंप्यूटर से पूरी तरह अलग होता है और लाखों गुना ज्यादा तेजी से गणना (Calculation) कर सकता है। आप इसे कंप्यूटर्स का 'बाहुबली' भी कह सकते हैं। जो काम आम कंप्यूटर्स के बस की बात नहीं होती, उन मुश्किल और जटिल वैज्ञानिक कामों को यह चुटकियों में निपटा देता है।
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सामान्य कंप्यूटर में केवल एक ही सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) या प्रोसेसर होता है। इसके विपरित, Supercomputer के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है जिसे नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है।
- हजारों प्रोसेसर की ताकत: Supercomputer में एक या दो नहीं, बल्कि हजारों प्रोसेसर एक साथ मिलकर काम करते हैं।
- नोड्स का नेटवर्क: इन सभी प्रोसेसर्स को छोटे-छोटे ग्रुप्स में बांट दिया जाता है, जिन्हें 'नोड्स' कहते हैं। एक बड़े सुपरकंप्यूटर में ऐसे 10,000 से भी ज्यादा नोड्स हो सकते हैं।
- फास्ट इंटरकनेक्ट: ये सभी नोड्स आपस में एक बहुत ही फास्ट नेटवर्क के जरिए जुड़े होते हैं, जिससे ये एक टीम की तरह काम करते हैं।
- एडवांस स्टोरेज: डेटा को तेजी से स्टोर करने और प्रोसेस करने के लिए इनमें बेहद एडवांस मेमोरी और स्टोरेज सिस्टम का यूज होता है।
Supercomputer Race in Hindi: चीन ने सुपरकंप्यूटर रेस में अमेरिका को कैसे पीछे छोड़ा?
ग्लोबल सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया (Supercomputer Race in Hindi) में पिछले कुछ समय से अमेरिका का दबदबा कायम था, लेकिन सुपरकंप्यूटर के नए प्रोजेक्ट ने पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया है। चीन ने करीब तीन साल बाद इस लिस्ट में धमाकेदार वापसी की है। चीन के इस नए Supercomputer की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसमें किसी विदेशी तकनीक या अमेरिकी पार्ट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने इस मशीन में पूरी तरह से अपने देश में बने ‘Domestic Chip’ का ही इस्तेमाल किया है। जहां दुनिया के ज्यादातर फास्ट सुपरकंप्यूटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के काम के लिए GPU नाम की ग्राफिक्स चिप का प्रयोग करते हैं, वहीं चीन ने सिर्फ CPU के दम पर नंबर 1 की कुर्सी हासिल की है। बता दें कि इसे चालू रखने के लिए करीब 42.2 मेगावाट बिजली की भारी-भरकम जरूरत पड़ती है। इसी स्वदेशी तकनीक के दम पर चीन ने अमेरिका की बादशाहत को चुनौती दी है।
Supercomputer Race in Hindi: चीन के सुपरकंप्यूटर प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी और उसकी कमियां
भले ही चीन ने नंबर 1 की कुर्सी का खिताब अपने नाम किया है, लेकिन टेक एक्सपर्ट का कहना है कि यह जीत सिर्फ कागजी या दिखावे के लिए ज्यादा है। आज के समय में पूरी टेक इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा है। लेकिन चीन का यह नंबर 1 सुपरकंप्यूटर AI से जुड़े एडवांस कामों के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
जब वैज्ञानिक और टेक संस्थाओं द्वारा AI वर्कलोड को परखने के लिए इसका स्पेशल टेस्ट लिया गया, तो इसकी परफॉर्मेंस उम्मीद के हिसाब से काफी कम थी। इस टेस्ट का रिजल्ट आते ही चीन का यह टॉप सिस्टम दुनिया में सीधे चौथे नंबर पर खिसक गया। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसके आर्किटेक्चर और वास्तविक उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं।
Supercomputer Race in Hind: कैसे तय होती है दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर की रैंकिंग?
ग्लोबल सुपरकंप्यूटर रैंकिंग 'TOP500' नाम की संस्था द्वारा साल में दो बार यानी की जून और नवंबर में तय की जाती है। किसी भी सिस्टम को लिस्ट में शामिल करने के लिए उसे कई कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ता है, तब जाकर रैंकिग का पता लगता है।
- LINPACK (HPL) बेंचमार्क: यह टेस्ट Supercomputer को गणित के बेहद कठिन समीकरण हल करने के लिए देता है।
- FLOPS यूनिट: परफॉर्मेंस टेस्ट के लिए मुख्य रूप से 'फ्लॉप्स' (FLOPS) यूनिट का इस्तेमाल किया जाता है, जो कंप्यूटर की गणना करने की स्पीड के बारे में जानकारी देता है।
- HPCG और HPL-MxP टेस्ट: वास्तविक वैज्ञानिक कामों के लिए HPCG टेस्ट और AI वर्कलोड को चेक करने के लिए HPL-MxP टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
- रियल स्पीड: रैंकिंग में सिर्फ किताबी या थ्योरिटिकल स्पीड को नहीं, बल्कि टेस्ट के दौरान मिली वास्तविक स्पीड (सस्टेन्ड परफॉर्मेंस) को ही अंतिम पैमाना माना जाता है।
भारत बनाम चीन सुपरकंप्यूटर: इस रेस में भारत कहां खड़ा है?
अब आता है सबसे महत्वपूर्ण सवाल की आखिर इस महा-मुकाबले (Supercomputer Race in Hind) में हमारा भारत कहां खड़ा है और किस नंबर पर है? ग्लोबल सुपरकंप्यूटिंग की रेस में भारत अभी 'मिड-लीग' यानी मध्यम वर्ग में खड़ा है। भारत के पास फिलहाल अमेरिका या चीन जितने बड़े और अत्यधिक शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर्स तो नहीं हैं, लेकिन भारत अपनी क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहा है, ताकि वह भी इन देशों से कॉम्पटिशन कर सके।
| सुपरकंप्यूटर का नाम | देश | टेस्ट स्पीड (बेंचमार्क) | ग्लोबल रैंकिंग (TOP500) | मुख्य विशेषता |
| चीनी न्यू सिस्टम | चीन | टॉप रैंक | नंबर 1 | पूरी तरह घरेलू CPU चिप्स पर आधारित |
| शक्ति क्लाउड | भारत | 84.31 पेटफ्लॉप्स | 32वां स्थान | भारत का सबसे शक्तिशाली AI सुपरकंप्यूटर |
| परम रुद्र सीरीज | भारत | विभिन्न (क्लाउड ग्रिड) | स्वदेशी ग्रिड | आत्मनिर्भर भारत के तहत निर्मित |
भारत का ‘Shakti Cloud’ देश का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बना: मिली जानकारी के मुताबिक, नई TOP500 ग्लोबल रैंकिंग में भारत का ‘Shakti Cloud’ देश का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बनकर उभरा है। दुनिया के टॉप सुपरकंप्यूटर्स (World Top 10 Supercomputers) की इस लिस्ट में ‘Shakti Cloud’ को 32वां स्थान मिला है। 'योटा डेटा सर्विसेज' (Yotta Data Services) में मौजूद इस सुपरकंप्यूटर ने हाई परफॉर्मेंस लिनपैक बेंचमार्क टेस्ट पर 84.31 पेटफ्लॉप्स की शानदार रफ्तार (Speed) दर्ज की है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद दुनिया के शीर्ष (Top) देशों में शामिल जैसे अमेरिका, चीन और भारत के टॉप सिस्टम्स के बीच परफॉर्मेंस का एक बड़ा अंतर अभी भी बना हुआ है। लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में प्रमुख शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों में अब तक 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कंप्यूटिंग पावर 47 पेटफ्लॉप्स तक पहुंच गई है। भारत ने आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए स्वदेशी ‘Param Rudra’ सीरीज तैयार की है, जिसमें भारत में ही डिजाइन किए गए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
निष्कर्ष
सुपरकंप्यूटर आज सिर्फ रिसर्च लैब की शोभा नहीं हैं, बल्कि यह देश की सुरक्षा, मौसम की सटीक भविष्यवाणी, हेल्थकेयर में वैक्सीन बनाने और AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए बेहद जरूरी हथियार बन चुके हैं। सुपरकंप्यूटिंग केवल कैलकुलेशन की स्पीड के बारे में नहीं है, बल्कि यह देश के वैज्ञानिक और आर्थिक विकास की रफ्तार को तय करने का भी एक माध्यम है।
चीन सुपरकंप्यूटर की इस ताजा रिपोर्ट से साफ है कि आने वाले समय में यह मुकाबला और बड़ा एवं दिलचस्प होगा। जैसा कि हम ऊपर पढ़कर आए हैं कि चीन ने Supercomputer Race in Hind में अपना नाम पहले स्थान पर दर्ज किया है। ऐसे में भारत भले ही आज 32वें नंबर पर हो, लेकिन 'परम रुद्र' और 'शक्ति क्लाउड' जैसी स्वदेशी पहलों के दम पर भारत बहुत जल्द ग्लोबल स्टेज पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हो रहा है। एक दिन ऐसा आएगा, जब भारत के पास भी अमेरिका और चीन जैसी सुपरकम्प्यूटिंग ताकत होगी और स्थान पहला होगा।
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