Flypped Hindi

अमेरिका की ढील: क्या भारत को फिर मिलेगा ईरान का सस्ता तेल

By |
अमेरिका की ढील: क्या भारत को फिर मिलेगा ईरान का सस्ता तेल

Trump Administration Easing Iran Oil Sanctions News in Hindi : ताजा खबरों के अनुसार, ऐसा बताया जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों को अस्थाई तौर पर हटाने के संकेत दिए हैं। जिसके कारण दुनियाभर के ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।

ट्रंप प्रशासन के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के एक इंटरव्यू के अनुसार, इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि समुद्र में जहाजों पर आ रहे करोड़ों बैरल ईरानी तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने की अनुमति दी जा सकती है।

क्या आप भी ऐसा मानते हैं? कि अमेरिका का यह कदम न केवल तेल की कीमतों को नियंत्रित कर सकता है, बल्कि भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Trump Administration Easing Iran Oil Sanctions News in Hindi

अमेरिका के इस कदम के पीछे की वजह क्या है?

दुनियाभर के कई विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति में यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • सप्लाई का दबाव: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले को देखते हुए क्या हम ऐसा मान सकते हैं कि अमेरिका-ईरान युद्ध और तनाव के कारण शिपिंग और उत्पादन में आई रुकावट की भरपाई करने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है।
  • करोड़ों बैरल का स्टॉक: स्कॉट बेसेंट के अनुसार, समुद्र में फिलहाल 14 से 17 करोड़ बैरल ईरानी तेल कार्गो के रूप में मौजूद है।
  • चीन का दबदबा कम करना: क्या आपको पता है? कि वर्तमान में चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। पाबंदियों में ढील मिलने से यह तेल भारत, जापान और मलेशिया जैसे अन्य एशियाई देशों की ओर आ सकता है, जिससे चीन को बाजार दर पर तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
  • तेल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्ट रुख है कि वे कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।

यह भी पढ़ें : ईरान युद्ध: क्या ट्रंप और नेतन्याहू के बीच पड़ने लगी है दरार?

भारत को कितना और कैसे होगा फायदा?

बहुत कम लोगों को पता है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है। ईरानी तेल की वापसी भारत के लिए राहत और अवसर दोनों है, जिसे आप निम्नलिखित बातों के माध्यम से समझ सकते हैं:

  1. होर्मुज स्ट्रेट का विकल्प: भारत के कच्चे तेल का 60% से ज्यादा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिसमें से आधा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण यह मार्ग बाधित हुआ है। अमेरिका की इस ढील से समुद्र में मौजूद ईरानी कार्गो तक पहुंच मिलने से सप्लाई की दिक्कतें कम होंगी।
  2. रिफाइनरियों के लिए अनुकूल: गौर करने वाली बात यह है कि ईरान का 'लाइट' और 'हेवी' ग्रेड कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों को इसे प्रोसेस करने का पुराना अनुभव है, इसलिए उन्हें बहुत कम ऑपरेशनल बदलाव करने होंगे।
  3. आर्थिक बचत: ऐसा कहा जाता है कि वर्ष 2018 से पहले ईरान भारत को अनुकूल कीमतों और आसान पेमेंट शर्तों पर तेल देता था। यदि फिर से ऐसी व्यवस्था बनती है, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

यह भी पढ़ें : ईरान को ट्रंप का अल्टीमेटम! साउथ पार्स गैस फील्ड पर महाविनाश का खतरा

ट्रंप के इस फैसले की चुनौतियां और अनिश्चितताएं

हम सबको इस बात के बारें में भी अच्छे से पता होना चाहिए कि भले ही पाबंदियों में ढील की बात चल रही हो, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है, जितनी हम सोचते रहे हैं। इसे आप निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं, जैसे कि –

  • बीमा और शिपिंग: आपको बता दें कि पाबंदियां सिर्फ बिक्री नहीं रोकतीं, बल्कि शिपिंग, बीमा और पेमेंट गेटवे को भी मुश्किल बना देती हैं। यह बात साफ है कि जब तक ये व्यवस्थाएं स्पष्ट नहीं होतीं, सौदे जोखिम भरे रहेंगे।
  • अमेरिकी आंतरिक राजनीति: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने हाल ही में ईरान पर पाबंदियां सख्त करने वाला बिल पास किया है। ऐसे में बेसेंट के प्रस्ताव को कितना समर्थन मिलेगा, यह कहना मुश्किल है।

क्या भारत फिर से बनेगा प्रमुख डिमांड सेंटर?

इस लेख में दी गई जानकारी के अनुसार, आपको यह बात तो पता चल गई होगी कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है। यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह भारत ने भारी छूट वाले रूसी तेल का लाभ उठाया, वैसा ही अनुभव ईरानी तेल के मामले में भी दोहराया जा सकता है।

बहुत से लोगों का इस मुद्दे पर यह कहना है कि यह सिर्फ रिफाइनिंग क्षमता पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरणों और अमेरिकी नीति की स्पष्टता पर निर्भर करेगा। यदि पाबंदियों में टिकाऊ राहत मिलती है, तो भारत चीन के मुकाबले एक बड़े डिमांड सेंटर के रूप में उभरेगा।

यह भी पढ़ें : 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न :  समुद्र में फिलहाल कितना ईरानी तेल मौजूद है?

उत्तर: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल वर्तमान में फ्लोटिंग स्टोरेज और ट्रांजिट में मौजूद है।

प्रश्न :  2018 से पहले भारत के तेल आयात में ईरान की कितनी हिस्सेदारी थी?

उत्तर: हैरान कर देने वाली बात यह है कि पाबंदियां सख्त होने से पहले भारत के कुल तेल आयात में ईरानी तेल की हिस्सेदारी लगभग 11.5% तक पहुंच गई थी।

प्रश्न : अमेरिका ईरानी तेल को बाजार में क्यों लाना चाहता है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध के कारण बाधित हुई सप्लाई चेन को ठीक करना, तेल की कीमतों को कम करना और चीन के एकाधिकार को चुनौती देना है।